कवर्धा जिले के वनांचल क्षेत्र थाना रेंगाखार जंगल के ग्राम लोहारीडीह मैं 15 सितंबर दिन रविवार के सुबह 8:00 बजे मध्य प्रदेश के ग्राम बीजाटोला रेलवाही थाना बिरसा जिला बालाघाट मैं फांसी से लटकी हुई एक लाश मिली जो शिव प्रसाद साहू ग्राम लोहारीडीह का था, जहां पर ग्रामीण पहुंचकर पहचान किया और शिव प्रसाद के साहू के जिम्मेदार रघुनाथ साहू को मान लिए क्योंकि दोनों के बीच लंबे समय से दुश्मनी थी, जिसे सुनकर ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे और लगभग पूरे गांव के लोग वहां देखने के लिए पहुंच चुके क्योंकि ग्राम लोहारीडीह से घटना स्थल की दूरी 10 किलोमीटर के आसपासकी है, मृतक के शरीर को देखते ही ग्रामीण भडक उठे, मृतक शिव प्रसाद साहू और उसी के गांव के रघुनाथ साहू जो उप सरपंच है के साथ 20 साल से अधिक से लगातार दुश्मनी चलकर आ रही थी और कुछ समय से पूरा गांव का दुश्मन हो चुका था रघुनाथ साहू क्योंकि उसे कुछ समय पहले समाज से भी बाहर कर दिया गया था और पूरा गांव एक तरफ और रघुनाथ साहू एक तरफ जैसे स्थिति उसे गांव में बन चुकी थी, जिसके कारण ग्रामीणों ने रघुनाथ साहू के ऊपर शक किया कि यही इसकी हत्या का विषय फांसी पर टंगा दिया है, इस शक पर ग्रामीणों ने भड़क कर रघुनाथ साहू के घर पहुंच गए और पूरा बस्ती पहुंच गया उसके घर को घर लिए और वहां पर उसके परिवार के साथ मारपीट किए घर में पैरा पेट्रोल डीजल लाकर रघुनाथ साहू के ऊपर हमला कर दिए और उसे कमरा में बंद कर आग लगा दिए (पुलिस विभाग अनुसार) जिससे रघुनाथ साहू जिंदा जल गया पूरा ग्रामीणों ने घर को घेर रखा था जैसे तैसे उनके परिवार पुलिस की सहायता से वहां से भाग निकले उनके छोटे-छोटे नाती उनकी बीवी उनके बच्चे उनके बहू सारे लोग जैसे तैसे उसे घर से निकल गए, मामला की भनक पुलिस विभाग को 15 सितंबर को लगभग 10:30 से 11:00 बजे के बीच पता चल चुका था आकर देख तो भीड़ बहुत ज्यादा थी तत्काल बड़े अधिकारों को सूचना की गई जब तक एसपी डॉक्टर अभिषेक पल्ला पहुंचे तब तक काफी देर हो चुकी थी घर में पूरा आग लग चुका था सिलेंडर फटने लगे थे लगभग 40 से 50 लोगों का अभिषेक पल्लव के साथ था उन्होंने भी काफी मशक्कत किया कि घर के अंदर घुसकर आग बुझाया जा सके और कुछ भी कर रघुनाथ साहब को निकाला जा सके परंतु भीड़ के सामने विवस हो गए और वापस हो गए, उसके बाद तत्काल 450 सुरक्षा बलों की फोर्स बुलाई गई ग्राम लोहारी दी को छावनी में तब्दील कर दिया गया तब तक लगभग 4:30 से 5:00 बज चुके थे भारी संख्या में पुलिस देखते ही ग्रामीण भाग निकले जैसे तैसे फायर ब्रिगेड ने आग बुझाए और परिवार जनों के माध्यम से आरोपियों की पहचान के लिए हर घर गए जिसमें लगभग 70 80 लोगों की गिरफ्तारी 15 सितंबर को ही हो गई बाकी लोग भाग निकले, 15 सितंबर के शाम 7:30 के आसपास जब पूर्ण रूप से आग बुझा लिया गया घर पूरा जलकर खाक हो चुका था कोई भी सामान घर में नहीं बचा था सब जल चुका था जिसमें रघुनाथ साहू भी लगभग 50% उसकी शरीर जल चुकी थी उसकी मृत्यु हो चुकी थी दिन के 11:00 आग लगा था और शाम के 7:00 बज चुके थे बॉडी मिलते हैं निकाला गया, और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया उसी रात जितने लोग गिरफ्तार हुए थे उन्हें थाना रेंगाखार में रखा गया, 16 सितंबर को शिव प्रसाद साहू उर्फ़ कचरू के बॉडी को मध्य प्रदेश से पोस्टमार्टम करा कर गांव लाया गया जिसका कफन दफन का कार्यक्रम गांव के मुक्तिधाम में किया गया उसे दिन गांव में सन्नाटा छा चुका था गांव के 70% घरों में ताला लगा चुके थे गांव में सिर्फ बूढ़े बच्चे महिलाएं कुछ ही घरों में बचे हुए थे राशन पानी की बहुत दिक्कत थी मवेशी की दिक्कत थी जिसे तत्काल एसडीएम ने जानकारी लेकर स्वास्थ्य विभाग और पशु चिकित्सा विभाग को बुलाकर गांव के छोटे-छोटे बच्चे बूढ़े गर्भवती महिलाओं एवं मवेशियों की देखभाल के लिए व्यवस्था बनाई, 16 सितंबर को ही जितने लोग की गिरफ्तारी हुई थी इतने लोग को जेल भेज दिया गया, और पूरा गांव में पुलिस फोर्स बिछी हुई थी, घटना के तीसरा दिन 17 सितंबर को गांव में भाजपा नेता पूर्व विधायक अशोक साहू कैलाश चंद्रवंशी संतोष पटेल मंगलू परते राजकुमार मेरावी क्षेत्र के अंनेकों नेता ग्राम लोहारी पहुंचे जहां पर रघुनाथ के घर को देखा जायजा लिया उसके बाद कचरू साहू के घर जाकर उनके बच्चों से मिले हाल-चाल जाना और जितना संभव हो सके मदद करने की बात कही, घटना बड़ी थी इसलिए 17 सितंबर को ही लगभग 4:00 बजे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गांव में पांच विधायकों के साथ घटना के बारे में जानकारी और जांच के लिए पहुंच गए जहां पर उन्होंने रघुनाथ साहू के घर जाकर जायजा लिया कचरू साहू के परिवार से मिला गांव में बच्चे कुछ लोगों से चर्चा किया और कहा कि शिव प्रसाद साहू उर्फ़ कचरू के साथ गलत हुआ है वह एक अच्छा कांग्रेस का कार्यकर्ता नेता था हम तत्काल उसका सेकंड ऑपिनियन के लिए दोबारा उसका पोस्टमार्टम करेंगे और जल्द से जल्द आरोपी पकड़े जाएंगे करवा संदेह कर पूर्व मुख्यमंत्री चले गए, चौथा दिन अर्थात 18 सितंबर को मृतक रघुनाथ साहू की बॉडी जो पोस्टमार्टम के लिए रायपुर गई थी क्योंकि उनका आधा शरीर जल गया था जिसे उनके निजी खेतवाड़ी में 10 संस्कार किया गया जो उनके कुछ परिवार के लोग शामिल हुए गांव से कोई नहीं आया क्योंकि गांव की अधिकतर लोग फरार हैं पुलिस की मौजूदगी में 10 संस्कार का कार्यक्रम किया गया संस्कार का कार्यक्रम जैसे हुआ वैसे ही सूचना मिली की जेल में प्रशांत साहू की मृत्यु हो गई है जिसका मुख्य कारण है पुलिस की मार पुलिस के द्वारा बहुत ज्यादा मारपीट किया गया है सारे आरोपियों के साथ बहुत ज्यादा मारपीट किया गया है जैसे गंभीर आरोपों के साथ या बात सामने आई, जब प्रशांत साहू के घर पहुंचे तब पता चला कि प्रशांत साहू लोग तीन भाई हैं दो भाई जेल में एक भाई पुलिस कस्टडी में और प्रशांत की मां भी दुर्ग जेल में है उनके घर में मात्र दो बहुत छोटे-छोटे बच्चों के साथ बचे हुए हैं बाकी रघुनाथ हत्याकांड में सभी लोग जेल चले गए हैं, प्रशांत साहू के मौत के मामले में कांग्रेस के द्वारा लगातार प्रदर्शन किया गया जिला अस्पताल के सामने धरना दिया गया मजिस्ट्रेट सुबोध मिश्रा के सामने प्रशांत साहू के पोस्टमार्टम किया गया जिसे हाई वोल्टेज ड्रामा के बीच उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा रात में जिला अस्पताल से 12:30 बजे प्रशांत साहू के शरीर को लेकर ग्राम लोहारी देवी 2:00 रात में पहुंचे परिवार से मिलकर उनका दंड बांध और कहां की जो भी इसमें दोषी हैं चाहे पुलिस वाले हो या कोई भी हो किसी को छोड़ नहीं जाएगा सब पर बराबर कार्रवाई होगी का कर प्रशांत साहू के बर्थडे को सौंप कर उपमुख्यमंत्री चले गए, पांचवा दिन यानी 19 सितंबर को सुबह मृतक प्रशांत साहू के परिवार जो जेल में थे उन्हें लाया गया उनका शरीर पहले ही घर पहुंच चुका था जिसके 10 संस्कार के लिए तैयारी की गई राजस्व विभाग पुलिस विभाग अन्य विभाग सब मौके पर उपस्थित थे प्रशांत साहू के निजी खेत में घर से लगा हुआ वहां पर उन्हें दफन की तैयारी की गई परिवार से मिलने के लिए भाजपा के तमाम नेता पहुंचे और यह कार्यक्रम चलते-चलते ही मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी पहुंच गए जहां पर परिजनों ने प्रशांत साहू के शरीर को पूर्ण रूप से खोल दिया सारे कपड़े प्लास्टिक हटा दिए यह दिखाने के लिए की पुलिस के मर के कितने जख्म है कितने निशान हैं जब उसके शरीर को खोला गया तो मृतक प्रशांत साहू के शरीर पर बहुत ज्यादा मार के निशान स्पष्ट रूप से देखे जा सकते थे जो दिल दहला देने वाला था जिसमें प्रशांत साहू के भाई उसके मन बिलख बिलख कर रो रो कर यह बताएं कि पुलिस के द्वारा बहुत ज्यादा मारपीट किया गया है और उनके अन्य साथी भी जेल में इसी स्थिति में है चलने की स्थिति में नहीं है सारे लोग बहुत बीमार है जहां पर इलाज भी ढंग से नहीं होता जैसे गंभीर आरोप लगाया गया, भूपेश बघेल के साथ अन्य चार-पांच विधायक और आए उसी दिन मौके पर पीएससी छत्तीसगढ़ अध्यक्ष दीपक बैज भी मौके पर पहुंचे परिवार से मिले और बड़ी जांच का आश्वासन दिए कि प्रशांत साहू को जितने भी मारा है कोई नहीं बचेंगे और कचरू साहू कभी दोबारा पोस्टमार्टम करेंगे जैसे बातों के साथ हुआ दिन भी लगभग खत्म हुआ, उसी दिन शाम संतोष पांडे सांसद भी गांव में पीड़ित परिवारों से आकर मिले और उच्च स्तरीय जांच का बात कहा गया। छटवा दिन यानी 20सितंबर तक या मामला बहुत ज्यादा गर्मा गया था क्योंकि प्रशांत साहू की मौत जेल में हुई थी तो सीधा-सीधा विपक्ष ने गृहमंत्री को घेरा जो इसी क्षेत्र के विधायक भी हैं इस हाई वोल्टेज ड्रामा के बीच में बहुत सी कार्यवाही के लिए शासन मजबूर हो गई जिसमें कार्रवाई करते हुए जिला के कलेक्टर जिला के पुलिस कप्तान डॉक्टर अभिषेक पल्लव को कवर्धा जिले से हटा दिए दो अन्य पुलिस कर्मचारियों पर एक महिला पुलिस कर्मचारी और एक पुरुष कर्मचारी पर बर्खास्त की का आदेश जारी हो गया वहीं थाना रेंगाखार के 23 स्टाफ को तत्काल लाइन अटैच कर दिया गया जैसे बड़े-बड़े करवाई शासन प्रशासन के माध्यम से हुई, घटना के सातवां दिन यानी 21 सितंबर को कांग्रेस के द्वारा छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया गया, विजय शर्मा गृहमंत्री के इस्तीफा की मांग जिन पुलिसकर्मियों ने वेदम टी किया है उन पर फिर की मांग शिव प्रसाद साहू का पुनः पोस्टमार्टम कर जांच करने की मांग प्रशांत साहू को एक बड़ी राशि और सरकारी नौकरी देने के मांग जैसे आने को मांग को लेकर छत्तीसगढ़ बंद कराया गया जिसमें मिली जुली असर रही कहीं बंद कहीं चालू जैसी स्थिति रही और पूरा दिन सियासी गलियां रे बहुत तेज रहे राजनीति का गहमागहमी बड़ा भारी रहा, साहू समाज के द्वारा गांव में शांति कायम हो इसलिए एक बड़ा कार्यक्रम रखा गया जिसमें प्रमुख रूप से साहू समाज के समस्त लोग पहुंचे उसी दिन शाम को छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण शाव एवं विजय शर्मा साथ में मंत्री टंकेश वर्मा पंडरिया विधायक भावना बोहरा विधायक ईश्वर साहू, साथ तमाम भाजपा के बड़े नेता ग्राम लोहारीडीह पहुंचे जहां पर सबसे पहले प्रशांत साहू के घर पहुंचे और जैसा कि शासन ने वादा किया था कि प्रशांत साहू के परिवार को 10 लाख रुपए की मुआवजा देंगे वह राशि उन्हें दी गई उसके अलावा शिवप्रसाद साहू के परिवार से रघुनाथ के साहू के परिवार से सबसे भेंट मुलाकात कर गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपील की गई जो भी समस्या है उसके लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही गई। घटना के आठवा दिन 23 सितंबर को साहू समाज के प्रदेश अध्यक्ष ग्राम में आकर समस्या को देख समाज के बीच शांति व्यवस्था किस प्रकार से बने के लिए मीटिंग किया और उसी दिन पुणे डिप्टी सीएम विजय शर्मा और ईश्वर साहू विधायक गांव पहुंचे जहां पर पुणे सभी परिवार वालों से मिलकर हाल-चाल जाना, घटना के नौवां दिन यानी 23 सितंबर को सांसद बिलासपुर तोखन साहू गांव पहुंचकर तीनों मृतक के परिवार से मिलकर सब इतना व्यक्त किया और समाज के प्रमुखों से बैठकर चर्चा किया कि इस गांव में शांति व्यवस्था किस प्रकार बने कैसे बने, इस प्रकार से लगातार प्रतिदिन पक्ष विपक्ष के नेता ग्राम लोहारी के गलियारों को राजनीति से गर्म रखें हैं । मामला लगातार बढ़ते ही जा रहा है सारा गांव एक व्यक्ति के खिलाफ कैसे हुआ उसे व्यक्ति की जान लेने के लिए क्यों या स्थिति बनी? कचरू साहू ने आत्महत्या किया या कचरू साहू का किसी ने मर्डर किया और किया तो जांच धीरे क्यों हो रही है? प्रशांत साहू को क्या इतना मारने का पुलिस को अधिकार था, कि पुलिस के मार से प्रशांत साहू की जान चली गई क्या यह अधिकारों के खिलाफ नहीं? गांव में बचे हुए छोटे-छोटे बच्चे बूढ़े गर्भवती महिलाएं विकलांग गांव में बंदे मवेशी इनका इंतजाम शासन प्रशासन कितना दिन तक करते रहेगा उनके घर के लोग कब वापस आएंगे 70% घरों में लगे ताला कब खुलेंगे या मामला कब सुनेगा जैसे बड़े सवाल अधिक खड़े हो रहे हैं देखना या है कि शासन प्रशासन उसे गांव में कैसी व्यवस्था करती है कि लोक तालमेल से रहे अच्छे से रहे यह सारी दुश्मनी खत्म एक कुशल गांव बने, जैसे सवाल अभी बाकी है।
लोहारीडीह अग्निकांड हत्याकांड, सियासी पारा गरम